परम आदरणीय श्री त्रिपाठी जी की विद्वता को प्रणाम है आपका राम चरित मानस का ज्ञान अद्भुत है राजेंद्र दास जी महाराज के रआमआयणई के सम्मान में विद्वता सम्मेलन में आपके वाणी सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।कोटी कोटी प्रणाम है 🙏💐🙏
भागवत कथावाचक को ज्ञान त्रिपाठी जी जैसे विद्वानों द्वारा की गई हिंदी व्याख्या है।अन्यथा 95% बड़े-बड़े कथावाचक का मुंह ही न खुल पाए।सनातन में परम्परा का बहुत महत्व है।सैकड़ों वर्षों से जब विद्वानों ने कहा है कि भागवत में राधा का नाम नहीं है।तो उसे काटने के लिए लाख बार मनन करिये तब ज़बान खोलिये। अन्यथा परिणाम अनादर।50 वर्ष पूर्व भागवत की व्याख्या श्रीधर जी द्वारा संस्कृत में की गई थी ।जो भागवत से भी कठिन थी। हमें गर्व करना चाहिए त्रिपाठी जी जैसे विद्वानों पर। गाना गाकर नचाकर कथा कहने वाले बहुत हैं। जैसे डाक्टर का कम्पाउन्डर नकली डाक्टर बन जाता है वैसे ही कथा वाचक के बजनिये कथा कहने लगते हैं
आचार्य जी आप से निवेदन है कि ये सावित करने की कृपा करें कि भागवत पुराण के रचयिता वेदव्यास है यदि हैं तो महाभारत और पुराणों में श्री कृष्ण के चरित्र में अंतर क्यों है ।🙏🙏
कल्पभेद कारण होता है, सृष्टि पहली बार ही नही हुई है, पहले भी अनगिनत बार हो चुकी है, आगे भी इसी प्रकार चलती रहेगी, इस क्रम में अनेकों बार राम-कृष्ण के अवतार होते रहते है, और हर बार के अवतार में मूल कथा वही रहती है, पर घटने के तरीके कुछ भिन्न भिन्न होते है, अब यह व्यासजी पर निर्भर करता है कि वे किस कल्प की कथा को अपनी दिव्यदृष्टि से देखकर लिखते है, जैसे आप महाभारत व भागवत के कथाभेद की बात कर रहे है, पर विष्णु पुराण या अन्य पुराण देखेंगे तो उनकी कथा में भी भेद मिल जाएगा। अब यदि कथान्तर न हो तो विविधता का अंत हो जाएगा, हरि अनंत हरि कथा अनंता, ये उक्ति व्यर्थ हो जाएगी। अब व्यासजी श्रीकृष्ण की कथा का हर पुराण में एक सा वर्णन कर देंगे तो सरसता व विचित्रता कैसे रह पाएगी, विद्वान बहुत प्रकार से उसे कैसे कह पाएंगे, कथाभेद का उद्देश्य रुचि बढ़ाना है, न कि संशय।
@@muft-ka-upchar-pradip-kumar नहीं, आप मेरा प्रश्न नहीं समझे, त्रिपाठीजी यहाँ पर किसी कथा में कथावाचक की प्रशंसा कर रहे हैं। उन कथावाचक का नाम जानना चाह रहा हूँ। त्रिपाठी जी स्वयं इस कथा के व्यास नहीं हैं, वे तो कथा सुनने आए हुए हैं video में।
अन्यथा न ले ।।अनिरुद्ध आचार्य जी भी एक महान कुल मे जन्मे आदर्श व्यक्तित्व की छवि वाले गुरुदेव है।। दीक्षा देकर बहूत आतमाओ को ईश्वर मार्ग पर ले जा रहे है।। त्न पन धन समय संकल्प मे पवित्र ता है ।। स्टेज पर त्रिपाठी जी ने जो भी कहा अच्छा न लगा । फिर भी हमारे लिए दोनो गुरुदेव पूज्य है ।।
भक्ति बहुत ही अच्छी होती है पर अन्ध भक्ति बहुत ही बुरी होती है त्रिपाठी जी ने जो भी कहा है शास्त्र सम्मत और व्याकरण सम्मत है सुधा जी आप छोड़ो आप क्या जानें शास्त्र और व्याकरण क्या होता है क्योंकि आप ने पढ़ा हो तो जानें इसीलिए त्रिपाठी जी की बात आपको बुरी लगी
@@sudhatripathi1866 तिर्पाठी जी ने जो कहा बिल्कुल सही कहा सभी कथा वाचक राधा जी का नाम न होने की बात करते हैं। परन्तु अनिरुद्ध जी अपने को श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
Agar Shree krishna ko unke paryayvachi words se pukara ja sakta he to Radha ji ko kyo nahi.. upnishads me Radha ji ke 28 naam bataye he... aur unn me hi kai naam srimadbhagwataam me aaye he... like shree....Rama...gopi... etc then to aise koi kah sakta he ki Radha ji kaa naam srimadbhagwataam me nahi he... ye to saaf saaf ghamand bol raha he..sirf aik ved pathi Brahman ka... jo sirf theoritical tak hi simit he.. aur agar kisi ladke mohan ki mata ka naam Rekha he ...agar koi us Mahila ko Rekha kahe ya mohan ki amma baat to aik hi he.....
गुरुजी के चरणों में वंदन के पश्चात् ये विनम्र आग्रह है कि श्री राम जी के विवाह के समय श्री जानकी जी के उम्र के बारे में जो कहा उससे भ्रमित हो गया हूँ कृप्या मार्गदर्शन करे ??🙏🙏
भागवत कथावाचक को ज्ञान त्रिपाठी जी जैसे विद्वानों द्वारा की गई हिंदी व्याख्या है।अन्यथा 95% बड़े-बड़े कथावाचक का मुंह ही न खुल पाए।सनातन में परम्परा का बहुत महत्व है।सैकड़ों वर्षों से जब विद्वानों ने कहा है कि भागवत में राधा का नाम नहीं है।तो उसे काटने के लिए लाख बार मनन करिये तब ज़बान खोलिये। अन्यथा परिणाम अनादर।50 वर्ष पूर्व भागवत की व्याख्या श्रीधर जी द्वारा संस्कृत में की गई थी ।जो भागवत से भी कठिन थी। हमें गर्व करना चाहिए त्रिपाठी जी जैसे विद्वानों पर। गाना गाकर नचाकर कथा कहने वाले बहुत हैं। जैसे डाक्टर का कम्पाउन्डर नकली डाक्टर बन जाता है वैसे ही कथा वाचक के बजनिये कथा कहने लगते हैं
Koti koti naman gurudev ji
Jay Shri krishna🙏🙏
Jai shree Radhe Radhe Radhe Krishna
जय श्री कृष्ण, राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे कृष्णा
जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम
❤❤❤😊😊😊
Radhe Radhe Guru ji.
Guru ji apBarmnoKeSirmorHen.KotiKotiParnam.
बहुत ही सुन्दर कथा प्रस्तुति।आप जैसे विद्वान और विनम्र जन मिलना असम्भव है। आपको साष्टांग प्रणाम करता हूं। जय श्री राधे कृष्णा
जय हो गुरुदेव शास्त्रों के ज्ञाता आपकी जय हो
संस्कृत के परम विद्वान है रामकृपाल जी
❤
परम आदरणीय त्रिपाठी जी आदरणीय है और आदरणीय रहेंगे
दिव्य सत्संग और अनुभूति.
श्री सद्गुरू देव भगवान् केयुगग्मपाद् पद्मो में दासानुदास का कोटि-कोटि दण्डवत् सादर प्रणाम्!
परम आदरणीय गुरु जी के चरणो में कोटि कोटि नमन।अभी तक इसके पूर्व कभी नहीं सुना गया था।
प्रणाम गुरुदेव ज्ञान वर्षा
गुरुदेव भगवान के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम
जय श्री कृष्ण 🙏
आदरणीय महाराज जी मेरे ह्रदय की इच्छा है आपसे मैं सीखूं
गुरूजी को सादर प्रणाम कलयुग में ऐसे विद्वान दुर्लभ है
परम आदरणीय त्रिपाठी जी, बहुत विद्वान एवम सनातन संस्कृति के प्रकाण्ड मर्मज्ञ हैं ,आपको सादर प्रणाम
जब गुरु जी बोलते हैं तो ऐसा लगता है कि साक्षात श्री कृष्ण जी ही बोल रहे हैं।❤❤❤❤❤❤❤
सादर प्रणाम
Sadar Pranam
कभी आप को सामने सुनने का मन है ।भगवान की कृपा से ही संभव होगा।ड्रॉ आलोक शुक्ल
वंदन,अभिनंदन।
प्रवचन का अद्भुत तरीका।
वाणी में मधुरता।
प्रणाम।
परम आदरणीय श्री त्रिपाठी जी की विद्वता को प्रणाम है आपका राम चरित मानस का ज्ञान अद्भुत है राजेंद्र दास जी महाराज के रआमआयणई के सम्मान में विद्वता सम्मेलन में आपके वाणी सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।कोटी कोटी प्रणाम है 🙏💐🙏
अ...रे महाराज जी अंगूर के रस का तात्पर्य शराब है.........!!!!
सादर प्रणाम स्वीकार करें महाराज
गरदेव को नमन
विद्वत वरेण्य श्री त्रिपाठी गुरुजी को सादर दण्डवत।
Jai ho juru je
Jay ho gurdev bhagwaan ki
👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आपके जैसे गुरु चरण ही शास्त्रों का वास्तविक स्वरूप समाज के सम्मुख प्रस्तुत करने में समर्थ हैं
श्रीगुरू चरणों में सादर प्रणाम करता हूं
समर्थ गुरु श्री त्रिपाठी जी महाराज के श्री चरणों में दास का साष्टांग दंडवत प्रणाम
Gurudevkomerakotipranam
वाह... त्रिपाठी कक्का श्री... अद्भुत व्याख्यान... आप सा दूजा अब तक कोई नहीं मिला...
सादर प्रणाम श्री गुरु जी तथा श्री व्यास जी
प्रतिभाशाली व्यक्तित्व द्वारा प्रभावशाली वक्तव्य
सादर कृतज्ञता
ऐसे विद्वानों का सानिध्य मिलना बड़ा ही दुर्लभ है
श्री स्वामी जी चरणों मे साष्टांग प्रणाम
मिलने की उत्कट ईच्छा हो रही है
Jai ho
राधे राधे जय श्री कृष्णा 🌹🌼🌼
भागवत कथावाचक को ज्ञान त्रिपाठी जी जैसे विद्वानों द्वारा की गई हिंदी व्याख्या है।अन्यथा 95% बड़े-बड़े कथावाचक का मुंह ही न खुल पाए।सनातन में परम्परा का बहुत महत्व है।सैकड़ों वर्षों से जब विद्वानों ने कहा है कि भागवत में राधा का नाम नहीं है।तो उसे काटने के लिए लाख बार मनन करिये तब ज़बान खोलिये। अन्यथा परिणाम अनादर।50 वर्ष पूर्व भागवत की व्याख्या श्रीधर जी द्वारा संस्कृत में की गई थी ।जो भागवत से भी कठिन थी। हमें गर्व करना चाहिए त्रिपाठी जी जैसे विद्वानों पर। गाना गाकर नचाकर कथा कहने वाले बहुत हैं। जैसे डाक्टर का कम्पाउन्डर नकली डाक्टर बन जाता है वैसे ही कथा वाचक के बजनिये कथा कहने लगते हैं
सत्यवचनामृत
Aadarniya. Shri. Maha bhag. Tripathi ji. Ko. Shat shat. Naman
Jai Guru Dev ji aap jaisa koi ni🙏🙏🙏🙏
Pranam guriji
राधे राधे
Anand aa gayaa Tripathi ji
Tripathi ji ko mera shat shat pranam
Sadar pranam
सादर प्रणाम 🙏
Jai ho
Jay shri hari
गुरुजीके चरनोमेन कोटि कोटि प्रणाम. बहुत अचछा प्रबचन. आपके ज्ञान का फायदा सबको मिले
श्री त्रिपाठी महराज जी से भागवत कथा के विषय के लिए संपर्क सूत्र मिल सकता है
श्री सीताराम 🙏
Mil jayega
Bahut sunder
🙏🌷🙏
Good
Moorkhh log apko samanjh nhi paye vakai aap bde vidwan h aur awaj bhi lajvav h
👌👌
Wah
💐💐💐🙏🙏🙏🏻🚩🚩🚩
जय हो।
जय हो
आचार्य जी आप से निवेदन है कि ये सावित करने की कृपा करें कि भागवत पुराण के रचयिता वेदव्यास है यदि हैं तो महाभारत और पुराणों में श्री कृष्ण के चरित्र में अंतर क्यों है ।🙏🙏
कैसा अन्तर है
तोय करने कया है साबित करने के नई करने
कल्पभेद कारण होता है, सृष्टि पहली बार ही नही हुई है, पहले भी अनगिनत बार हो चुकी है, आगे भी इसी प्रकार चलती रहेगी, इस क्रम में अनेकों बार राम-कृष्ण के अवतार होते रहते है, और हर बार के अवतार में मूल कथा वही रहती है, पर घटने के तरीके कुछ भिन्न भिन्न होते है, अब यह व्यासजी पर निर्भर करता है कि वे किस कल्प की कथा को अपनी दिव्यदृष्टि से देखकर लिखते है, जैसे आप महाभारत व भागवत के कथाभेद की बात कर रहे है, पर विष्णु पुराण या अन्य पुराण देखेंगे तो उनकी कथा में भी भेद मिल जाएगा। अब यदि कथान्तर न हो तो विविधता का अंत हो जाएगा, हरि अनंत हरि कथा अनंता, ये उक्ति व्यर्थ हो जाएगी। अब व्यासजी श्रीकृष्ण की कथा का हर पुराण में एक सा वर्णन कर देंगे तो सरसता व विचित्रता कैसे रह पाएगी, विद्वान बहुत प्रकार से उसे कैसे कह पाएंगे, कथाभेद का उद्देश्य रुचि बढ़ाना है, न कि संशय।
कल्प भेद से भेद हैं
त्रिपाठी गुरु जी को मेरा नमन
🙏🙏
Gurudev APA ki Katha karana chahte hai Krupa kare
किन व्यासजी की कथा का यह चलचित्र है? कृपया बताएँ कि पण्डितजी किनके लिये कह रहे हैं कि ये बहुत शुद्ध कथा करते हैं ।
श्री राम कृपाल त्रिपाठी
@@muft-ka-upchar-pradip-kumar नहीं, आप मेरा प्रश्न नहीं समझे, त्रिपाठीजी यहाँ पर किसी कथा में कथावाचक की प्रशंसा कर रहे हैं। उन कथावाचक का नाम जानना चाह रहा हूँ। त्रिपाठी जी स्वयं इस कथा के व्यास नहीं हैं, वे तो कथा सुनने आए हुए हैं video में।
जी आप सही कह रहे हैं लेकिन वे ऐसे नहीं हैं वो तो बोलना पड़ता है उनके उत्साह बढ़ाने के लिए
@@muft-ka-upchar-pradip-kumar क्या आप जानते हैं कि कौन कर रहे थे कथा
अखिलेश शास्त्री
Op
अनिरुद्धचर्य को भाव् से माफ़ी मांगनी चाहिए
हा सब ठीक है पर भाव व प्रेम महाराज जी का राधे मे ही है ।। भागवत मे राधा का नाम वधू शब्द मे है।।
अन्यथा न ले ।।अनिरुद्ध आचार्य जी भी एक महान कुल मे जन्मे आदर्श व्यक्तित्व की छवि वाले गुरुदेव है।। दीक्षा देकर बहूत आतमाओ को ईश्वर मार्ग पर ले जा रहे है।। त्न पन धन समय संकल्प मे पवित्र ता है ।। स्टेज पर त्रिपाठी जी ने जो भी कहा अच्छा न लगा । फिर भी हमारे लिए दोनो गुरुदेव पूज्य है ।।
भक्ति बहुत ही अच्छी होती है पर अन्ध भक्ति बहुत ही बुरी होती है त्रिपाठी जी ने जो भी कहा है शास्त्र सम्मत और व्याकरण सम्मत है सुधा जी आप छोड़ो आप क्या जानें शास्त्र और व्याकरण क्या होता है क्योंकि आप ने पढ़ा हो तो जानें इसीलिए त्रिपाठी जी की बात आपको बुरी लगी
पर ये है अनिरुद्धाचार्य कितनी संस्कृत जानते हैं और कितनी व्याकरण ये दुनिया जानगई
@@sudhatripathi1866 तिर्पाठी जी ने जो कहा बिल्कुल सही कहा सभी कथा वाचक राधा जी का नाम न होने की बात करते हैं।
परन्तु अनिरुद्ध जी अपने को श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
Ye samaj ki galti hai ki o sab Sanskrit ki ktha sunna hi nhi chahte kevl nachna chahte hai isliye o oopr vala bhi sabko ncha rha
Agar Shree krishna ko unke paryayvachi words se pukara ja sakta he to Radha ji ko kyo nahi.. upnishads me Radha ji ke 28 naam bataye he... aur unn me hi kai naam srimadbhagwataam me aaye he... like shree....Rama...gopi... etc then to aise koi kah sakta he ki Radha ji kaa naam srimadbhagwataam me nahi he... ye to saaf saaf ghamand bol raha he..sirf aik ved pathi Brahman ka... jo sirf theoritical tak hi simit he.. aur agar kisi ladke mohan ki mata ka naam Rekha he ...agar koi us Mahila ko Rekha kahe ya mohan ki amma baat to aik hi he.....
Galti kiski hain aap JAISE gurujano ki Jo sab jante hue bhi nhi padhte na ek virodh krte
गुरुजी के चरणों में वंदन के पश्चात् ये विनम्र आग्रह है कि श्री राम जी के विवाह के समय श्री जानकी जी के उम्र के बारे में जो कहा उससे भ्रमित हो गया हूँ कृप्या मार्गदर्शन करे ??🙏🙏
किताबी ज्ञान तो अच्छा है पर भक्ति भाव कुछ और ही बात है
शास्त्रार्थ की परम्परा वैदिक काल से है इसमें कुछ ग़लत नहीं
tripathi ji sirf ved padhi brahman hai lekin un me vo jara se bhi gun nahi he jo ek braahman me hone chahiye
ब्राह्मण तो त्रिपाठी जी ही है।जो सत्य कहना जानते हैं और कहते हैं
आप बहुत ज्ञानी h मगर ऐसे मंच में अनिरुधाचार्य जी से माइक को छिन के कोन सा वाला ज्ञान को दिखाये h आप थोडा समझा दीजिए महराज जी
भागवत कथावाचक को ज्ञान त्रिपाठी जी जैसे विद्वानों द्वारा की गई हिंदी व्याख्या है।अन्यथा 95% बड़े-बड़े कथावाचक का मुंह ही न खुल पाए।सनातन में परम्परा का बहुत महत्व है।सैकड़ों वर्षों से जब विद्वानों ने कहा है कि भागवत में राधा का नाम नहीं है।तो उसे काटने के लिए लाख बार मनन करिये तब ज़बान खोलिये। अन्यथा परिणाम अनादर।50 वर्ष पूर्व भागवत की व्याख्या श्रीधर जी द्वारा संस्कृत में की गई थी ।जो भागवत से भी कठिन थी। हमें गर्व करना चाहिए त्रिपाठी जी जैसे विद्वानों पर। गाना गाकर नचाकर कथा कहने वाले बहुत हैं। जैसे डाक्टर का कम्पाउन्डर नकली डाक्टर बन जाता है वैसे ही कथा वाचक के बजनिये कथा कहने लगते हैं
अनिरुद्ध आचार्य जैसे गलत व्याख्या करें तो टोकना जरूरी था अनिरुद्ध सारे.विद्वान को.चुनौती देरहे.थे
Vo galat bol rahe the to vidvan aadmi to tokegahi
Vo glat bole the aur slock Ka galat arth Kiya tha to tripathi ji ne Sahi hi kiya
tripathee ji, Bhagwan k liye sanskrite, gyan ka ye bahari vidya valueless hai. khud ko pratit karne k liye mahamurkh mat baño.
सीमा जी बन्दर अदरक का स्वाद क्या जाने
dev vani, ved vani
संस्कृत फालतू है और संस्कृत नहीं आती तो रामचरितमानस पढढ़ो। भागवत मत ख़राब करो
Contact number dejiye
Bhaiya Tripathi ji aap apna whatsapp number bhejne ki kripa karenge ?.(Tejeshwar Sharma)
जय हो